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सबसे अमीर विधायक बना 'एक दिन का भिखारी', सड़क पर खाया खाना; जानें क्यों करना पड़ा ये काम

 Reported By: Saket Rai,  Written By: Amar Deep
 Published : Sep 14, 2026 11:16 am IST,  Updated : Sep 14, 2026 11:16 am IST

महाराष्ट्र के सबसे अमीर विधायक ने एक दिन के लिए भिखारी का जीवन जीया, जो इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। उनके पास 3400 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है, लेकिन फिर भी उन्हें एक दिन के लिए भिखारी का जीवन क्यों जीना पड़ा, इसकी वजह भी सामने आ गई है।

पराग शाह एक दिन के लिए बने भिखारी।- India TV Hindi
पराग शाह एक दिन के लिए बने भिखारी। Image Source : REPORTER INPUT

महाराष्ट्र से एक अजीबोगरीब मामला सामने आ रहा है। दरअसल, महाराष्ट्र में सबसे अमीर विधायक ने एक दिन के लिए गरीबी का जीवन जीया। इतना ही नहीं उन्होंने सड़क पर उतरकर भीख भी मांगी। यह मामला काफी चर्चा में है। बता दें कि महाराष्ट्र के सबसे अमीर विधायक ने एक दिन के लिए न सिर्फ भिखारी का जीवन जीया, बल्कि उन्होंने भीक्षा मांगकर भोजन करने का अनुभव भी लिया। हम बात कर रहे हैं 3400 करोड़ से ज्यादा के मलिक पराग शाह की। पराग शाह महाराष्ट्र की घाटकोपर ईस्ट विधानसभा क्षेत्र के विधायक हैं। पराग शाह एक अलग सामाजिक और धार्मिक अनुभव लेने के लिए भिखारी का वेश धारण कर सड़कों पर निकले। इस दौरान वे सामान्य लोगों की तरह सार्वजनिक स्थानों पर गए, लेकिन वेश बदलने के कारण कई लोग उन्हें पहचान नहीं सके।

गुरु की सलाह पर एक दिन के लिए बने भिखारी

जानकारी के मुताबिक, जैन धर्म के चातुर्मास के दौरान पराग शाह के गुरु नम्रमुनि ने उन्हें एक दिन भिखारी के जीवन और उसकी परिस्थितियों को करीब से समझने का अनुभव लेने की सलाह दी थी। इसी के तहत पराग शाह ने अपने नियमित सुरक्षा और अन्य संसाधनों से अलग रहते हुए मेकअप के जरिए भिखारी का रूप धारण किया। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर जाकर लोगों से संपर्क किया और भिक्षा मांगकर भोजन करने का भी अनुभव लिया। बाद में उन्होंने अपना वास्तविक परिचय सामने आने के बाद कुछ स्थानों पर दोबारा जाकर लोगों से बातचीत की और अपने अनुभव को साझा किया।

पराग शाह का भिखारी बनना चर्चा का विषय

पराग शाह घाटकोपर ईस्ट विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। उनका यह प्रयोग अब चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, इस घटना को केवल एक अलग व्यक्तिगत और धार्मिक अनुभव के रूप में देखा जा रहा है, जिसके जरिए उन्होंने समाज के एक वर्ग के जीवन और उसकी परिस्थितियों को समझने की कोशिश की। सवाल यह भी उठता है कि क्या किसी व्यक्ति के जीवन की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को कुछ घंटों या एक दिन के अनुभव से पूरी तरह समझा जा सकता है। यही पहलू इस घटना को केवल एक व्यक्तिगत अनुभव से आगे बढ़ाकर सामाजिक चर्चा का विषय भी बनाता है।

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